सांस्कृतिक योगदान
हमारी संस्कृति में देशी जीवमूल के गौवंश का प्राचीन समय से हमारी दिनचर्या में पालन पोषण का महत्व है अपवाद सवरूप ही कोई होगा जो गौग्रास गौ माता के निमित्त न रखता हो धर्म ग्रंथो में, संत प्रवचनों और चिकित्स्य प्रणाली में महत्व जग जाहिर है | गोपाष्ठमी, गौ पुत्र द्वादशी और गोवर्धन वह उत्सव है जो इसे प्रमाणित करते हैं | गौसेवा को सबसे उत्तम सेवा मन जाता है
आध्यात्मिक अनुभव
स्वामी श्री श्री १००८ श्री भजननन्द जी स्वामी श्री चेतनदास जी गोकुंज में गौसेवा करने से अत्यंत शांत, पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण स्वस्छित का आभास होता है। यहाँ आने वाले गौसेवकों को देख शांति का अनुभव कर सकते हैं। वह मर्यादित हो अपनी सेवा कार्य में लगे रहने से सेवा करने का पूर्ण अवसर प्राप्त होता है | हमारे महाराज जी कहते है जीवन में जनम से मरण तक एक भी कार्य ऐसा नहीं है जो बिना गौमाता के सहयोग से पूर्ण होता हो |