श्री श्री १००८ श्री भजनानन्द जी महाराज

जन्म:-

राजस्थान मण्डलार्न्तगत जयपुर जनपद में जयपुर नगर के पास उत्तर दिशा में नींदड़ नाम का एक छोटा सा गांव है, गाँव के उत्तर दिशा में ही थोड़ी दूर बंध की ढाणी है। वशिष्ठ गोत्र में उत्पन्न हुए, श्री रामकुमार जी के पुत्र यके श्री जीवन राम जी के भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के तदनुसार 18 सितम्बर 1926 के पावन दिन महाराज श्री भजनानन्द जी का जन्म हुआ। इस दिन जलझूलनी एकादशी का पर्व भी था घर में एक साथ दो सपुत्रों का जन्म बहुत ही आनन्दित करने वाला था।
शिक्षा:- पितामह रामकुमार जी ने दोनों बालकों को प्राथमिक ज्ञान घर पर ही प्रदान करने कार्य स्वयं संभाला। ढाणी में कोई विद्यालय नहीं था। कुछ समयोपरान्त पितामह श्री रामकुमार जी ने दोनों बच्चों को नींदड़ पाठशाला में प्रवेश दिला दिया। प्राथमिक शिक्षा नींदड़ में हुई। कुशाग्र बुधी होने के कारण सिघ्र ही समझ ज्ञान जड़ने लगे। शिक्षा पूर्ण होने पर बड़े महाराज श्री भजनानन्द जी को राज्य सरकार ने दिल्ली रोड़ पर अचरोल ग्राम में पदस्थापन कर दिया था परन्तु महाराज श्री ने पदभार ग्रहण नहीं किए और एकान्त में बैठकर प्रभु चिन्तन एवं परोपकार के बारे में सोचते रहते थे।

विवाह:-

अपने माता जी व पिता जी के आदेश पालना में श्री बड़े महाराज भजनानन्द जी ने बैनाड़ निवासी श्रीनारायण जी की पुत्री सौभाग्यकांक्षिणी श्रीमती बकारती देवी के साथ विवाह किया। परन्तु मन तो सत्संग में ही कामन में ही रहते महाराज जी के श्री मिथिला बिहारी जी का जन्म हुआ। महाराज श्री परोपकार के लिए सत्संग गोप तथा श्री विधानी धाम, बंसीबट धाम, चतेन पवित्र धाम, सांवरियां टीबा आश्रम का निर्माण कराया।